टीनऐज में बच्चों को हो जाए प्यार

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अब वो जमाना नहीं रह गया जब लड़कियां पर्दे में रहा करती थी और लड़के लड़कियों की तरफ देखने से पहले कई बार सोचते थे।

अब तो टीनऐज में ही प्यार का चस्का बढ़ने लगा है। ऐसे में बच्चों के नए-नए प्यार या क्रश पर सैंकड़ों पाबंदियां लगाना भी उचित नहीं।

बल्कि उनके साथ बैठ कर उनका पक्ष सुना जा सकता है और उन्हें अपना नजरिया समझाया भी जा सकता है।

ऐसे में मां-बाप को जरूरत है तो थोड़े संयम और समझदारी की। इन हालात में आपा ना खोकर बच्चों को डांटे या मारें नहीं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बच्चे को जब प्यार हो जाए तो ऐसे हालात में आप क्या करें।

कैसे समझें बच्चों की स्थिति: माता-पिता के लिए बच्चों का नजरिया, उनकी सोच को समझना बेहद जरूरी है।

इसके लिए चाहिए कि वे बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करें। अकसर माता-पिता अपने बच्चों के साथ एक दायरे में रह कर बात करते हैं।

उनका मानना होता है कि इससे बच्चे माता-पिता की इज्जत करते हैं, पर देखा गया है कि ऐसे में ज्यादातर मामलों में बच्चे न सिर्फ माता-पिता से डरते हैं, बल्कि उन्हें अपनी रोजमर्रा की बातों को बताना जरूरी भी नहीं समझते हैं।

कैसे समझाएं अपना नजरिया: आज की स्थिति में बच्चों पर कुछ भी थोपा नहीं जा सकता। उनके साथ की गई किसी भी प्रकार की जबरदस्ती, उन्हें आपके खिलाफ खड़ा कर सकती है।

अगर माता-पिता अपने बच्चों को सही राह दिखाना चाहते हैं तो सबसे पहले बच्चों पर चीखना, चिल्लाना बंद करना होगा। उनके साथ बैठकर उन्हें अपने अनुभव सुनाएं। उन्हें अगर आप अपनी बात समझाएंगी तो वो आपकी बात समझेंगे। जानकार बताते हैं कि, हर किसी की जिंदगी में ये दौर आता है। आपने अपने समय में क्या किया था, ये बातें उनसे शेयर करें।

इस तरह आप क्या सोचती हैं यह बात आप अपने बच्चे को बातों-बातों में समझा भी पाएंगे।

पेरेंट्स अगर बच्चों के साथ खुलेंगे नहीं, तो बच्चे भी उनसे दूरी बनाकर रखते हैं। कई ऐसे होते हैं, जिनमें पेरेंट्स इस बात की शिकायत करते हैं कि बच्चे उन्हें कुछ भी बताते नहीं हैं। पर ज्यादातर मामलों में पेरेंट्स की तरफ से पहल करने में कमी दिखाई देती है। आज के माहौल में बच्चे सब कुछ ओपन चाहते हैं।

हां, सभी बातें उनसे नहीं की जा सकती, लेकिन उनके नजरिये को जानने के लिए उनसे दोस्ती जरूर की जा सकती है।

 

जब बच्चों को माता-पिता का साथ मिलता है, तो वे कभी कोई गलत काम नहीं करते। जिन मामलों में इसके उलट स्थिति देखी गई है, वहां यह भी देखा गया है कि बच्चे घर से भाग जाने से लेकर डिप्रेशन में जाने की वजह से आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं। इसलिए पहल आपको भी करनी होगी। जब एक-दूसरे का साथ देने और प्यार से बात बन सकती है तो फिर प्यार से ऐतराज कैसा?

क्या करें…

-बच्चों के साथ दोस्ती करें और उन्हें समझें

-बच्चों की भावनाओं का सम्मान करें

-उन्हें विश्वास दिलाएं कि आप उन पर पूरा विश्वास करते हैं

-उनके साथ अपने अनुभव बांटें

-स्थिति को बेहतर समझने के लिए कंसल्टेंट की सलाह लें

क्या न करें…

-बच्चों पर जोर-जबरदस्ती न करें

-उनके फोन या कंप्यूटर आदी के इस्तेमाल पर पाबंदी न लगाएं

-उन पर अपनी बात न थोपें

-बच्चों की बात सुनकर तुरंत गंभीर प्रतिक्रिया न दें

रिलेशनशिप एक्सपटर्स का मानना है कि माता-पिता को बच्चों के साथ एक स्वस्थ संबंध कायम करना चाहिए, जिसमें बच्चे अपनी बात माता-पिता के सामने रख सकें और माता-पिता अपना पहलू अपने बच्चों को समझा सकें। दोनों के बीच दोस्ती और विश्वास का संबंध होना चाहिए।

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